Tuesday, 27 September 2016

वर्ग चेतना - भगत सिंह

शहीदे आज़म भगतसिंह के 109वें जन्‍मदिवस के अवसर पर
"लोगों को आपस में लडऩे से रोकने के लिए वर्ग चेतना की जरूरत है। गरीब मेहनतकशों व किसानों को स्पष्ट समझा देना चाहिए कि तुम्हारे असली दुश्मन पूँजीपति हैं, इसलिए इनके हथकण्डे से बचकर रहना चाहिए और इनके हत्थे चढ़ कुछ न करना चाहिए। संसार के सभी गरीबों, चाहे वे किसी भी जाति, रंग, धर्म या देश के हों, अधिकार एक ही हैं। तुम्हारी भलाई इसी में हैं कि तुम धर्म, रंग, नस्ल और राष्ट्रीयता व देश के भेदभाव मिटाकर एक हो जाओ. . .।”
- भगत सिंह

Sunday, 25 September 2016

फ़िनलैंड की स्वतंत्रता

अमरीकी लेखिका व पत्रकार अन्ना लुई स्ट्रांग की प्रसिद्ध पुस्तक "स्तालिन युग" से कुछ अंश :-
फ़िनलैंड की स्वतंत्रता तो बोल्शेविक क्रांति का सीधा तोहफा थी। जब जार का पतन हो गया तो फ़िनलैंड ने स्वतंत्रता की मांग की। तब वह रूसी साम्राज्य का हिस्सा था। केरेंसकी सरकार ने इसे नामंजूर कर दिया। ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका भी तब फ़िनलैंड की स्वतंत्रता के पक्षधर नहीं थे। वे नहीं चाहते थे कि पहले विश्वयुद्ध में उनका मित्र रहा जारशाही साम्राज्य टूट जाए।
बोल्शेविकों के सत्ता सँभालते ही राष्ट्रीयताओं से जुड़ी समस्याओं के मंत्री स्तालिन ने इस बात को आगे बढाया कि फ़िनलैंड के अनुरोध को स्वीकार कर लिया जाए। उन्होंने कहा था: 'फिनिश जनता निश्चित तौर पर स्वतंत्रता की मांग कर रही है इसलिए "सर्वहारा का राज्य" उस मांग को मंजूर किए बिना नहीं रह सकता।'