अमरीकी लेखिका व पत्रकार अन्ना लुई स्ट्रांग की प्रसिद्ध पुस्तक "स्तालिन युग" से कुछ अंश :-
फ़िनलैंड की स्वतंत्रता तो बोल्शेविक क्रांति का सीधा तोहफा थी। जब जार का पतन हो गया तो फ़िनलैंड ने स्वतंत्रता की मांग की। तब वह रूसी साम्राज्य का हिस्सा था। केरेंसकी सरकार ने इसे नामंजूर कर दिया। ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका भी तब फ़िनलैंड की स्वतंत्रता के पक्षधर नहीं थे। वे नहीं चाहते थे कि पहले विश्वयुद्ध में उनका मित्र रहा जारशाही साम्राज्य टूट जाए।
बोल्शेविकों के सत्ता सँभालते ही राष्ट्रीयताओं से जुड़ी समस्याओं के मंत्री स्तालिन ने इस बात को आगे बढाया कि फ़िनलैंड के अनुरोध को स्वीकार कर लिया जाए। उन्होंने कहा था: 'फिनिश जनता निश्चित तौर पर स्वतंत्रता की मांग कर रही है इसलिए "सर्वहारा का राज्य" उस मांग को मंजूर किए बिना नहीं रह सकता।'
कितना अंतर है अफवाह और सच्चाई में!!
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