Monday, 26 December 2016

वामपन्थी” कम्युनिज़्म

जीवन का तकाज़ा पूरा होकर रहेगा। बुर्जुआ वर्ग को भागदौड़ करने दो, पागलपन की हद तक क्रुद्ध होने दो, हद पार करने दो, मूर्खताएँ करने दो, कम्युनिस्टों से पेशगी में ही प्रतिशोध लेने दो, गुज़रे कल के और आने वाले कल के सैकड़ों, हज़ारों, लाखों कम्युनिस्टों को (हिन्दुस्तान में, हंगरी में, जर्मनी में, आदि) कत्ल करने का प्रयत्न करने दो। ऐसा करके, बुर्जुआ वर्ग उन्हीं वर्गों की तरह पेश आ रहा है जिनके लिए इतिहास मौत का हुक़्म सुना चुका है। कम्युनिस्टों को जानना चाहिए कि भविष्य हर हाल में उनका है, इसलिए हम महान क्रान्तिकारी संघर्ष में उग्रतम उत्साह के साथ-साथ बहुत शान्ति और बहुत धीरज से बुर्जुआ वर्ग की पागलपनभरी भागदौड़ का मूल्यांकन कर सकते हैं, और हमें करना ही चाहिए।
लेनिन 
(“वामपन्थी” कम्युनिज़्म: एक बचकाना मर्ज़)

Sunday, 25 December 2016

कार्ल मार्क्स के दस प्रमुख सूत्र वाक्य

  1. पूंजी मृत श्रम है, जो पिशाच की तरह केवल जीवित श्रमिकों का खून चूस कर जिंदा रहता है।
  2. हर किसी से उसकी क्षमता के अनुसार, हर किसी को उसकी जरूरत के अनुसार।
  3. दुनिया भर के मजदूरों एकजुट हो जाओ, तुम्हारे पास खोने को कुछ नहीं है सिवाये अपनी जंजीरों के।
  4. महान सामाजिक बदलाव महिलाओं के उत्थान के बिना असंभव हैं।
  5. मानव मस्तिष्क जो न समझ सके, धर्म उससे निपटने की नपुंसकता है।
  6. सामाजिक प्रगति समाज में महिलाओं को मिले स्थान से मापी जा सकती है।
  7. जरूरत तब तक अंधी होती है जब तक उसे होश न आ जाए, आजादी जरूरत की चेतना होती है।
  8. लोगों की खुशी के लिए पहली आवश्यकता है- धर्म का अंत।
  9. कंजूस एक पागल पूंजीपति है, पूंजीपति एक तर्क संगत कंजूस।
  10. धर्म लोगों के लिए अफीम की तरह है।