Sunday, 25 December 2016

कार्ल मार्क्स के दस प्रमुख सूत्र वाक्य

  1. पूंजी मृत श्रम है, जो पिशाच की तरह केवल जीवित श्रमिकों का खून चूस कर जिंदा रहता है।
  2. हर किसी से उसकी क्षमता के अनुसार, हर किसी को उसकी जरूरत के अनुसार।
  3. दुनिया भर के मजदूरों एकजुट हो जाओ, तुम्हारे पास खोने को कुछ नहीं है सिवाये अपनी जंजीरों के।
  4. महान सामाजिक बदलाव महिलाओं के उत्थान के बिना असंभव हैं।
  5. मानव मस्तिष्क जो न समझ सके, धर्म उससे निपटने की नपुंसकता है।
  6. सामाजिक प्रगति समाज में महिलाओं को मिले स्थान से मापी जा सकती है।
  7. जरूरत तब तक अंधी होती है जब तक उसे होश न आ जाए, आजादी जरूरत की चेतना होती है।
  8. लोगों की खुशी के लिए पहली आवश्यकता है- धर्म का अंत।
  9. कंजूस एक पागल पूंजीपति है, पूंजीपति एक तर्क संगत कंजूस।
  10. धर्म लोगों के लिए अफीम की तरह है।

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