Tuesday, 30 May 2017

गद्दार सावरकर और चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह!

गद्दार सावरकर!

यशपाल जो चन्द्रशेखर आजाद और भगत सिंह के साथी थे, ने अपनी पुस्तक " सिंहावलोकन" में लिखा है: “भगत सिंह और अन्य साथियों की गिरफ्तारी के बाद पार्टी की स्थिति कमजोर हो गई थी ,दल के पास पैसे का संकट था… ऐसे में चन्द्रशेखर आजाद ने आर्थिक मदद की आशा में उन्हे (यशपाल) को सावरकर के पास पूना भेजा. यशपाल जब  उनके (सावरकर  के) निवास स्थान पर पहुचे तो उन्हे ढाई घंटे इन्तजार करना  पड़ा  क्योंकि सावरकर अन्दर पूजा में व्यस्त थे. जब वह पूजा  कर के बाहर निकले तो यशपाल ने अपना परिचय देते हुये आजाद का संदेश दिया. सावरकर ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई मे मै आप लोगों की कोई मदद नहीं कर सकता… हां, अगर तुम लोग मोहम्मद अली जिन्ना को मार देने का वादा करो ,तो हम तुम् लोगों के लिये एक के बजाय तीन विदेशी रिवाल्वर दे सकते हैं. यशपाल  लौटकर जब  यह वृतांत आजाद को सुनाया तो पंडित जी ने गाली देते हुये कहा कि हम क्रान्तिकारी  हैं और इस हरामखोर नें हमे किराये का हत्यारा समझ रखा है…
---[शिवबहादुर श्रीवास्तव]

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